Deprecated: mysql_connect(): The mysql extension is deprecated and will be removed in the future: use mysqli or PDO instead in /home/anushkaacademy/public_html/library/database.php on line 4
DR. ANUSHKA VIDHI MAHAVIDYALAYA - LAW COLLEGE UDAIPUR, RAJASTHAN, INDIA
Latest Result

???????????? ????? ???????

प्रधानमंत्री मोदी ने दांडी मेंनमक सत्याग्रह स्मारकका उद्घाटन कियाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जनवरी 2019 को गुजरात के सूरत और दांडी का दौरा किया. यहां उन्होंने सूरत हवाईअड्डे पर टर्मिनल भवन के विस्तार परियोजना और एक अस्पताल की आधाशिला रखी. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया.
नमक सत्याग्रह स्मारक
भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दांडी में 110 करोड़ रुपये के खर्च से 15 एकड़ में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक का निर्माण किया गया है.गांधीजी की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जनवरी को इसका उद्घाटन किया. अब यह स्मारक जनता के लिए खोल दिया गया है.
यहां 14 नमक बनाने वाले पेन रखे गये हैं. साथ ही खारा पानी भी उपलब्ध कराया गया है. पर्यटक जब खारा पानी पेन में डालेंगे, तब पेन के अंदर लगी हुई मशीन पानी का वाष्पीकरण कर देगी और पेन में नमक बन जाएगा.
इसके अतिरिक्त 41 सोलर वृक्ष प्रतिदिन 144 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेंगे. इनका इस्तेमाल स्मारक में बिजली की आपूर्ति के लिए किया जाएगा.

इसमें उन 80 पदयात्रियों की प्रतिमाएं हैं जिन्होंने दांडी मार्च में गांधी जी का साथ दिया था.

नमक सत्याग्रह स्मारक में 18 फीट ऊंची गांधीजी की प्रतिमा बनाई गई है.

यहां खारे पानी का कृत्रिम तालाब बनाया गया है जिसमें पर्यटकों को यात्रा के बारे में समझाया जायेगा.
इसके अलावा यहाँ उन 24 स्थलों के स्मृतिपथ भी बनाए गये हैं जहां गांधीजी गये थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व की सबसे बड़ी भगवद गीता का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 फरवरी 2019 को दिल्ली के ईस्ट ऑफ़ कैलाश स्थित इस्कॉन मंदिर में विश्व की सबसे बड़ी भगवद गीता का उद्घाटन किया. यहां उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी श्रीमद्भागवत गीता का विमोचन किया.

इस अवसर पर उन्होंने 800 किलो की 670 पृष्ठों वाली विशाल गीता का विमोचन किया तथा लोगों को संबोधित भी किया. सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मानवता के दुश्मनों से धरती को बचाने के लिए प्रभू की शक्ति हमेशा हमारे साथ रहती है. यही संदेश हम पूरी प्रमाणिकता के साथ दुष्ट आत्माओं, असुरों को देने का प्रयास कर रहे हैं.

सबसे बड़ी भगवद गीता की विशेषताएं

•    इस्कॉन संस्था द्वारा तैयार की गई विश्व की सबसे बड़ी गीता इटली के मिलान शहर में बनाई गई है.

•    इस महाग्रंथ का वजन 800 किलोग्राम है और इसे बनाने में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आई है.

•    करीब ढाई साल में इसकी छपाई हुई है, इसका कुल वजन 800 किलोग्राम है तथा इसमें 670 पृष्ठ हैं.

•    इस्कॉन के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद की ओर से गीता प्रचार के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह प्रकाशित कराई गई है. संस्था से जुड़े वेदांत बुक ट्रस्ट ने इसकी छपाई की है.

•    इस गीता में 670 पृष्ठ हैं, जिनका साइज़ 2.84 गुणा 2.0 मीटर है. प्रत्येक पृष्ठ को पलटने के लिए तीन से चार व्यक्तियों की जरूरत पड़ती है.

•    यह सिंथेटिक के मजबूत कागज से तैयार की गई हैं. माना जा रहा है कि इन पर कई प्रकार की धातु लगाई गई हैं, जिनमें प्लेटिनम, सोना और चांदी मुख्य हैं.

•    इसके कवर पृष्ठ को स्वर्णिम धातु से तैयार किया गया है.

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने जेल में रहकर भी गीता लिखी थी. तिलक ने लिखा था कि इसके संदेश का प्रभाव सिर्फ दार्शनिक या विद्वान लोगों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि गीता की एक प्रति मैंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी दी थी.

 

सर्जिंग सिल्क कार्यक्रम में 'बुनियाद' मशीनों का वितरण और मोबाइल एप्प 'ई-कोकून' लॉन्च

कपड़ा मंत्रालय और केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा हाल ही में सर्जिंग सिल्क कार्यक्रम के दौरान जनजातीय क्षेत्रों की महिला रीलरों को बुनियाद सिल्क रीलिंग मशीनें वितरित की गईं. मशीन का वितरण जांघों पर रीलिंग की पुरानी परंपरा के कुल उन्मूलन का हिस्सा है और तसर रेशम क्षेत्र में गरीब ग्रामीण और आदिवासी महिला रीलरों की सही कमाई सुनिश्चित करना इसका लक्ष्य है.

छत्तीसगढ़ के चंपा के एक उद्यमी के सहयोग से सेंट्रल सिल्क टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित की गई मशीन तसर सिल्क यार्न की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करेगी और महिलाओं के कठिन श्रम को कम करेगी. रीलिंग में जांघों के इस्तेमाल को समाप्त करने और मार्च 2020 का अंत तक इसे बुनियाद रीलिंग मशीन द्वारा बदलने की योजना है.

 

'बुनियाद' तसर सिल्क रीलिंग मशीन का लाभ

पारंपरिक विधि का उपयोग करने वाली महिला प्रतिदिन लगभग 125 रूपये कमाती हैं जबकि बुनियाद मशीन का उपयोग करने वाला एक तसर रीलर प्रतिदिन 350 रूपये कमा सकता है. कर और परिवहन शुल्क को छोड़कर मशीन की कीमत 8,475 रूपये प्रति यूनिट है. इससे निश्चित रूप से रेशम उत्पादन में लगे आदिवासी परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को सुधारने में मदद मिलेगी.

चीन के बाद भारत रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और रेशम का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. भारत की रेशम उत्पादन क्षमता 32,000 टन के वर्तमान स्तर से 2020 तक लगभग 38,500 टन तक पहुंचने की उम्मीद है.

 

सर्जिंग सिल्क कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु

  • इस आयोजन के दौरान, रेशम उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियां पाने वाले को सम्मानित किया गया.
  • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों को भी पुरस्कृत किया गया.
  • रेशम कीट के बीज के क्षेत्र में गुणवत्ता प्रमाणन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन ई-कोकून लॉन्च किया गया.
  • भारतीय रेशम उद्योग और राज्य सेरीकल्चर प्रोफाइल का संकलन भी इस अवसर पर जारी किया गया.
  • केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने अपने संबोधन में कहा कि 2013-14 के बाद रेशम उत्पादन में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

 

-कोकून मोबाइल एप्प

  • रेशम कीट के बीज के क्षेत्र में गुणवत्ता प्रमाणन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन ई-कोकून लॉन्च किया गया.
  • मोबाइल ऐप ई-कोकून रेशम कृमि क्षेत्र में गुणवत्ता प्रमाणन में मदद करेगा.
  • मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग रीयल टाइम रिपोर्टिंग के माध्यम से सिस्टम और उत्पाद प्रमाणन के लिए केंद्रीय बीज अधिनियम के तहत नामित बीज विश्लेषकों और बीज अधिकारियों द्वारा किया जाएगा.
  • बड़ी संख्या में हितधारकों - पंजीकृत बीज उत्पादकों (आरएसपी) और पंजीकृत चॉकीयरर्स (आरसीआर) को कवर करने के अलावा, आरएसपी, आरसीआर और रेशम के कीड़ों के अंडे के साथ अनिवार्य रूप से आवश्यक सिस्टम रेशम कीटपालन कीड़े पर प्रभावी निगरानी रखी जाएगी.

 

स्मृति ईरानी ने ‘तितानवाला म्यूजियम’ का उद्घाटन किया

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने 26 फरवरी 2019 को बगरू में हैंडब्लॉक प्रिंटिंग के ‘तितानवाला म्यूजियम‘ का उद्घाटन किया. उद्घाटन करने के बाद उन्होंने म्यूजियम की विभिन्न गैलरियों का भी अवलोकन किया.

तितानवाला म्यूजियम में बड़ी संख्या में पारम्परिक वुडन ब्लॉक, कपड़ों की रंगाई व छपाई के काम आने वाले बर्तन व सहायक उपकरण तथा छीपा समुदाय के इतिहास को दर्शाने वाले पुराने फोटोग्राफ प्रदर्शित किए गये हैं.

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘तितानवाला म्यूजियम’ ने यह साबित कर दिया है कि कला व संस्कृति को आगे बढ़ाने अथवा संरक्षित करने के लिए सरकार पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि यह म्यूजियम बगरू को पूरे विश्व में पहचान दिलाएगा. उन्होंने कहा कि ब्लॉक प्रिंटिंग की विरासत सूरज नारायण तितानवाला जैसे संग्रहकों की पहल के कारण ही संरक्षित है, जो स्वयं छीपा समुदाय से हैं.

बगरू की ब्लॉक प्रिंटिंग कैसे होती है?

•    बगरू नामक स्थान की ब्लॉक प्रिंटिंग प्राकृतिक रंग के साथ ब्लॉक प्रिटिंग पारंपरिक तकनीकों में से एक है, जिसका श्रेय राजस्थान के छीपा समुदाय को जाता है.

•    बगरू की हाथ से की जाने वाली इस ब्लॉक प्रिंटिंग का इतिहास 1,000 वर्षों से भी पुराना है.

•    इस तकनीक में पहले कपड़े को मुल्तानी मिट्टी में धोया जाता है फिर इसे हल्दी मिले पानी में डुबोया जाता है ताकि यह पीली आभा हासिल कर सके.

•    इसके बाद डाई किये गये इन कपड़ों पर विभिन्न प्रकार के ब्लॉक्स से छपाई की जाती है. यह सारा काम हाथ से किया जाता है.

•    सागौन-लकड़ी से बनाये गये लकड़ी के ब्लॉक का उपयोग डिजाइन को प्रिंट करने के लिए किया जाता है.

•    इन ब्लॉक्स को उपयोग से पहले रात भर तेल में भिगोया जाता है और फिर उपयोग में लाने से पहले धोया जाता है.

•    जिस कपड़े पर प्रिंटिंग की जाती है उसे चिकनी मिट्टी में भिगोकर तथा कुछ अन्य केमिकल लगाकर नरम किया जाता है.

•    कपड़े पर बेहद ध्यान से साफ़-सुथरे तरीके से ब्लॉक प्रिटिंग की जाती है. प्रिटिंग हो जाने के बाद कपड़े को धूप में सूखने के लिए रख दिया जाता है.

छीपा समाज के बारे में जानकारी

छीपा समाज के लोग भारत के पुरातन बुनकर समाज के लोग हैं. छीपा शब्द नेपाली भाषा के दो शब्दों “छी’ अर्थात् डाई करना एवं “पा” अर्थात् धूप में सुखाना से मिलकर बना है. इस समुदाय के लोग राजस्थान में काफी लंबे समय से ब्लॉक प्रिंटिंग करते हैं. इनके ब्लॉक्स पर मिलने वाली बारीक कारीगरी के कारण यह छपाई काफी प्रसिद्ध है.

 

 

 


Gallery